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उदयपुर जार ने किया वरिष्ठ कलम प्रहरियों का सम्मान, हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर बोले वक्ता, महज घटना की सूचना देने तक सीमित नहीं है पत्रकारिता

उदयपुर जार ने किया वरिष्ठ कलम प्रहरियों का सम्मान, हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर बोले वक्ता, महज घटना की सूचना देने तक सीमित नहीं है पत्रकारिता

गांव की आवाज न्यूज उदयपुर । । “पत्रकारिता महज किसी घटना की सूचना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन, एक विचार और मंथन है। न्याय, शुचिता, सुराज और सुसंस्कृत समाज के निर्माण में एक पत्रकार की भूमिका समाज सुधारकों, विचारकों और संतों के समान ही महत्वपूर्ण होती है।” यह उद्गार श्रीमद् दयानंद सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष डॉ. अशोक आर्य ने व्यक्त किए।
वे रविवार को गुलाबबाग स्थित नवलखा महल के माता लीलावंती सभागार में जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार), उदयपुर इकाई के तत्वावधान में आयोजित ‘कलम प्रहरी सम्मान – 2026’ समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

महर्षि दयानंद भी थे अपने समय के पत्रकार
डॉ. आर्य ने कहा कि समाज में व्याप्त कुरीतियों को सुधारने के लिए जागरूकता आंदोलन खड़े करने वाले महर्षि दयानंद सरस्वती जैसी महान विभूति भी अपने समय के पत्रकार ही थे, जिन्होंने ‘वेदभाष्य’ को मासिक पत्रिका के रूप में प्रकाशित किया। गुजराती मूल के होने के बावजूद उन्होंने वेदों की मीमांसा हिन्दी में की, क्योंकि उनका मानना था कि हिन्दी देश में सहज समझी जाने वाली भाषा है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि उस दौर में हिन्दी को अंग्रेजी और फारसी से संघर्ष करना पड़ रहा था, और आज इसे ‘हिंग्लिश’ से संघर्ष करना पड़ रहा है।
वरिष्ठ कलमकारों और उनकी जीवनसंगिनियों का हुआ सम्मान
जार उदयपुर के अध्यक्ष राकेश शर्मा राजदीप ने बताया कि समारोह में उदयपुर के छह वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान किया गया, जिन्होंने अपने सफर के संस्मरण साझा किए। सम्मानित होने वाले वरिष्ठ पत्रकारों में शामिल हैं:
नरेश शर्मा, श्रीकृष्ण जुगनू, राहुल शर्मा, राजेन्द्र शेखर व्यास, राजेन्द्र हिलोरिया, मांगीलाल लोहार
अनोखी पहल: कार्यक्रम की खास बात यह रही कि सभी वरिष्ठ पत्रकारों के साथ उनकी पत्नियों का भी सम्मान किया गया। इसके पीछे उद्देश्य यह संदेश देना था कि पत्रकार जब वक्त-बेवक्त समाज को समय देता है, तब परिवार को संभालकर पत्नी ही उसे चिंतामुक्त कार्य करने का संबल देती है।
तकनीक के दौर में पुरानी पीढ़ी की तपस्या को याद रखने की जरूरत

एडवोकेट निर्मल कुमार पंडित (मुख्य अतिथि): समाजसेवी एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण परिषद् के जिला चेयरमैन ने कहा कि समय के साथ सामाजिक बदलाव आते हैं। कलमकारों को नए जमाने के हिसाब से अपनी कलम को प्रखर करते हुए सामाजिक खामियों पर कड़ा प्रहार करना चाहिए।
गौरीकांत शर्मा (विशिष्ट अतिथि): सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के उपनिदेशक ने कहा कि आज की पीढ़ी को उस दौर से सीख लेनी चाहिए जब पत्रकारों ने पैदल चलकर पत्रकारिता की। आज तकनीक ने उस दौर के तपस्वी पत्रकारों की तपस्या को भुला दिया है।
सुभाष शर्मा (अध्यक्षता): जार के प्रदेश सह संयोजक व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने घोषणा की कि हिन्दी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के उपलक्ष्य में जार उदयपुर द्वारा वर्ष भर ऐसे गरिमापूर्ण आयोजन किए जाएंगे।

वरिष्ठ जन रहे उपस्थित
जार उदयपुर के महासचिव दिनेश हाड़ा ने बताया कि कार्यक्रम का संचालन अनिल चतुर्वेदी ने किया। इस दौरान सत्यार्थ प्रकाश न्यास के डॉ. अमृत लाल तापड़िया, भवानी दास आर्य, नारायण मित्तल सहित जार के प्रदेश कोषाध्यक्ष कौशल मूंदड़ा, प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक वैष्णव, उदयपुर जिला इकाई के पदाधिकारी और भारी संख्या में पत्रकार साथी मौजूद रहे। समारोह के बाद सभी ने नवलखा महल में नवस्थापित ‘राष्ट्र मंदिर दीर्घा’ के दर्शन किए तथा न्यास की ओर से सभी को सत्यार्थ प्रकाश का साहित्य भेंट किया गया।

Lilesh Suyal

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