उदयपुर

चित्तौड़गढ़ में पहली बार दिखा सफेद रेड सैंड बोआ सांप

चित्तौड़गढ़ में पहली बार दिखा सफेद रेड सैंड बोआ सांप

गांव की आवाज न्यूज नेटवर्क चित्तौड़गढ़। चितौड़गढ़ नगरी क्षेत्र में दुर्लभ एल्बिनो रेड सैंड बोआ सांप मिला। यह सांप पूरी तरह सफेद रंग का था। यह एक जेनेटिक विकार के कारण होता है, जो लाखों में से किसी एक सांप में पाया जाता है। सफेद सांप को देखकर ग्रामीण चौंक गए। नगरी के सरपंच देव किशन रैगर ने वन विभाग को सूचना दी। उप वन संरक्षक राहुल झांझरिया के निर्देश पर वन्य जीव प्रेमियों की टीम मौके पर पहुंची।

नगरी ग्राम पंचायत में नाहर सिंह सोलंकी के फॉर्म हाउस में सुबह यह सांप झाड़ियों में दिखा। वहां काम कर रहे ग्रामीणों ने इसे देखा और तुरंत सरपंच को जानकारी दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। सांप को देखने के लिए भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों ने पहली बार सफेद रंग का सांप देखा था। वन्य जीव प्रेमियों ने 15 मिनट में इसे सुरक्षित रेस्क्यू कर वन विभाग को सौंप दिया। इसके बाद इसे नेचुरल हैबिटेट में छोड़ दिया गया।

वन्य जीव प्रेमी मनीष तिवारी ने बताया कि सांप की लंबाई करीब साढ़े तीन फीट थी। इसे लोकल भाषा में धंबोई कहा जाता है। रेड सैंड बोआ का सामान्य रंग कत्थई (भूरा) होता है। सांपों में कई तरह के जेनेटिक विकार होते हैं। कुछ में शरीर का कुछ हिस्सा सफेद होता है, जिसे ल्युसिस्टिक कहते हैं। वहीं, कुछ सांपों में पूरा शरीर सफेद हो जाता है, जिसे एल्बिनो कहा जाता है। यह लाखों में से किसी एक सांप में पाया जाता है। जेनेटिक म्यूटेशन के कारण इसकी त्वचा पर पिगमेंटेशन नहीं होता, जिससे इसका प्राकृतिक रंग विकसित नहीं हो पाता। अच्छी बात यह है कि यह सांप विषहीन होता है। इसकी आंखें भी लाल रंग की होती हैं। माना जा रहा है कि राजस्थान में यह पहली बार देखा गया है।

Lilesh Suyal

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