राजस्थान

पद्माक्षी पुरस्कार योजना में कटौती: अब टॉपर छात्राओं को नहीं मिलेगी स्कूटी, नकद राशि भी घटी

पद्माक्षी पुरस्कार योजना में कटौती: अब टॉपर छात्राओं को नहीं मिलेगी स्कूटी, नकद राशि भी घटी

जयपुर।3 अगस्त 2025- राज्य सरकार ने छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए चलाई जा रही पद्माक्षी पुरस्कार योजना में बड़ा बदलाव किया है। माध्यमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा विभाग द्वारा शनिवार को जारी आदेश के अनुसार, अब आठवीं, दसवीं और बारहवीं कक्षा में जिला स्तर पर टॉप करने वाली छात्राओं को मिलने वाली पुरस्कार राशि घटा दी गई है, और अब उन्हें स्कूटी भी नहीं दी जाएगी।

घटा दी गई पुरस्कार राशि

आदेश के अनुसार, अब आठवीं कक्षा की टॉपर छात्राओं को पहले मिलने वाले ₹40,000 के बजाय ₹25,000 ही मिलेंगे। इसी तरह, दसवीं कक्षा की छात्राओं को ₹75,000 की जगह ₹50,000, और बारहवीं कक्षा की छात्राओं को ₹1 लाख के बदले ₹75,000 दिए जाएंगे।
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि बारहवीं की छात्राओं को अब स्कूटी भी नहीं मिलेगी, जो पहले पुरस्कार का हिस्सा हुआ करती थी।

नाम और आयोजन तिथि में भी बदलाव

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा वर्ष 2019 में इस योजना का नाम बदलकर इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी पुरस्कार कर दिया गया था, जिसे अब भाजपा सरकार ने फिर से “पद्माक्षी पुरस्कार” कर दिया है।
इसके अलावा अब यह अवॉर्ड 19 नवंबर (इंदिरा गांधी की जयंती) के बजाय बसंत पंचमी पर दिया जाएगा।

अवॉर्ड के लिए ये हैं मानदंड

यह पुरस्कार हर जिले में आठवीं, दसवीं और बारहवीं की टॉपर छात्राओं को मिलेगा।

छात्रा का टॉपर होने के साथ-साथ कम से कम 60% अंक लाना अनिवार्य है।

“स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल की बारहवीं कक्षा (विज्ञान संकाय) की छात्राओं के लिए 9 से अधिक CGPA प्राप्त करना अनिवार्य है।”

संस्कृत शिक्षा विभाग और विवेकानंद स्कूलों की छात्राओं को अलग श्रेणी में पुरस्कार दिया जाएगा।

व्यावसायिक शिक्षा में भी दसवीं और बारहवीं की टॉपर छात्राओं को पुरस्कार मिलेगा।

जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारियों पर

हर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को अब यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने जिले की संबंधित कक्षाओं की टॉपर छात्राओं की सूची तैयार करें और अवॉर्ड वितरण की प्रक्रिया सुनिश्चित करें।

शिक्षा विभाग का बयान

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की उप निदेशक सुनीता चावला ने पुष्टि की कि “पद्माक्षी योजना की राशि में इस बार परिवर्तन किया गया है। नया स्वरूप अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होगा।”

Lilesh Suyal

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