घासा-नूरड़ा में राजपूत समाज सुधार की ऐतिहासिक महापंचायत सम्पन्न; कुरीतियों पर लगा कड़ा प्रतिबंध
गांव कि आवाज न्यूज मावली। समाज में सामाजिक एकता, संस्कार और सुधार को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से घासा पंचायत समिति क्षेत्र के ग्राम पंचायत नूरड़ा स्थित बोरवाला बावजी परिसर में चौखला स्तरीय राजपूत समाज सुधार महापंचायत का भव्य आयोजन किया गया। इस महापंचायत में 17 से 18 गांवों के सैकड़ों समाजबंधुओं, वरिष्ठजनों और युवाओं ने भाग लेकर समाज सुधार के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए और संकल्प लिया।
महापंचायत में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की सक्रिय और सराहनीय भागीदारी रही। जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंण्डावत (गढ़पुरा) की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक को सफल बनाने में घासा तहसील अध्यक्ष नारायण सिंह पवार एवं उनकी पूरी टीम का विशेष योगदान रहा।
महापंचायत में लिए गए मुख्य ऐतिहासिक निर्णय
बैठक के दौरान वरिष्ठ वक्ताओं ने समाज में बढ़ती फिजूलखर्ची, नशाखोरी, दहेज प्रथा और दिखावे जैसे गंभीर विषयों पर मंथन किया। सर्वसम्मति से निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किए गए:
नशे पर पूर्ण प्रतिबंध: विवाह समारोहों में शराब, मांस और अन्य सभी प्रकार के नशे के उपयोग पर पूरी तरह से रोक रहेगी।
दहेज एवं तिलक-दस्तूर पर रोक: दहेज प्रथा और तिलक-दस्तूर परंपरा को पूर्णतः बंद किया गया है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सामाजिक स्तर पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
डीजे पर पाबंदी और सादगीपूर्ण विवाह: शादी-ब्याह में डीजे पूरी तरह बंद रहेगा। बिंदौली केवल पारंपरिक ढोल या महिला संगीत के साथ निकाली जाएगी। हल्दी, मेहंदी जैसी अनावश्यक रस्मों और दिखावे पर रोक रहेगी।
मृत्यु संस्कार में सादगी: मौत-मरण के दौरान केवल एक समय का भोजन और सीमित व्यवस्था ही मान्य होगी। मृत्यु संस्कार में वस्त्र देने की परंपरा केवल ननिहाल और ससुराल पक्ष तक सीमित रहेगी।
उपहार परंपरा में बदलाव: गोल विटी व अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में कपड़े-बर्तन देने की जगह केवल लिफाफा देने की परंपरा मान्य होगी।
डिजिटल निमंत्रण को बढ़ावा: फिजूलखर्ची रोकने के लिए शादी व अन्य आयोजनों के निमंत्रण कार्ड की जगह डिजिटल माध्यमों (WhatsApp आदि) का उपयोग करने पर जोर दिया गया।
17-18 गांवों की रही एकजुट भागीदारी
इस महापंचायत में नूरड़ा, सरड़िया, पीपरोली, झालों का ढाणा, वीडियो का कुआं, चरणिया तलाई, चौहानों की खेड़ी, पालवास खुर्द, पालवास कला, निम्बोलों का गुड़ा, घासा खेड़ी, रठाना, मंडप, प्रकाशपुरा, वाटेला और भीमल सहित आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।
सामूहिक शपथ और संकल्प:
महापंचायत के समापन पर बोरवाला बावजी देवस्थान में उपस्थित सभी वरिष्ठजनों और युवाओं ने सामूहिक रूप से समाज सुधार की शपथ ली। सभी ने संकल्प व्यक्त किया कि वे इन नियमों का स्वयं पालन करेंगे और अपने-अपने गांवों में इन्हें प्रभावी ढंग से लागू करवाएंगे।
वक्ताओं ने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, अनुशासन और संस्कारों में निहित है। राजपूत समाज द्वारा उठाई गई यह पहल पूरे क्षेत्र में सामाजिक जागरूकता और अनुशासन की दिशा में एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है।
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